कम बजट और तगड़ा कंटेंट: जानिए क्यों बॉक्स ऑफिस पर 300 करोड़ी एक्शन फिल्मों पर भारी पड़ रहा है हॉरर-कॉमेडी का नया दौर

 

बिना 300 करोड़ के भारी-भरकम बजट और बिना किसी 'मास एक्शन स्टार' के, अगर कोई फिल्म सिनेमाघरों के बाहर हाउसफुल के बोर्ड लगवा दे, तो समझ जाइए कि बॉक्स ऑफिस का समीकरण बदल चुका है। हालिया दौर में 'स्त्री 2', 'मुंज्या' और 'शैतान' जैसी फिल्मों ने यह साबित कर दिया है कि दर्शकों को अब सिर्फ गाड़ियां उड़ना और महंगा VFX नहीं चाहिए। आज का दर्शक सिनेमाघरों में डरने, हंसने और एक नया अनुभव जीने जा रहा है, जिसकी वजह से हॉरर-कॉमेडी का यह नया दौर 300 करोड़ी एक्शन ड्रामों पर बुरी तरह भारी पड़ रहा है।

300 करोड़ का बजट बनाम 'रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट' (ROI) का खेल

फिल्म इंडस्ट्री में इन दिनों सफलता का पैमाना बदल चुका है। किसी फिल्म में 250 से 300 करोड़ रुपये लगाकर 150-200 करोड़ का कलेक्शन करना मेकर्स के लिए नुकसान का सौदा साबित हो रहा है। इसके विपरीत, हॉरर-कॉमेडी जॉनर का 'रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट' (ROI) ट्रेड एनालिस्ट्स को भी हैरान कर रहा है।

आंकड़ों पर नजर डालें तो मैडॉक फिल्म्स की 'मुंज्या' का बजट महज 30 करोड़ रुपये के आसपास था, लेकिन इसने भारत में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा का नेट बिजनेस किया। वहीं, 50-60 करोड़ के बजट में बनी 'स्त्री 2' ने तो भारतीय सिनेमा के इतिहास के बड़े-बड़े रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए और 600 करोड़ रुपये से ज्यादा का कलेक्शन करके मेगा-बजट एक्शन फिल्मों के पसीने छुड़ा दिए।

दर्शकों को क्यों भा रहा है डर और हंसी का यह अनोखा संगम?

थिएटर जाकर फिल्म देखने की सबसे बड़ी वजह होती है 'सामूहिक अनुभव' (Collective Experience)। हॉरर-कॉमेडी एक ऐसा इकलौता जॉनर है, जो दर्शकों को एक पल में डराकर सन्नाटे में ले जाता है और अगले ही पल जोरदार ठहाके लगाने पर मजबूर कर देता है। यह इमोशनल रोलरकोस्टर राइड दर्शकों को पैसा वसूल अनुभव देती है।

इसके साथ ही, हॉरर-कॉमेडी फिल्में 'फैमिली ऑडियंस' को खींचने में बेहद कामयाब रही हैं। जहां आजकल की ज्यादातर मास-एक्शन फिल्मों में अत्यधिक हिंसा, खून-खराबा और एडल्ट कंटेंट की वजह से परिवार दूर रहता है, वहीं हॉरर-कॉमेडी को बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी एक साथ बैठकर एन्जॉय कर सकते हैं।

हालिया मिसालें जो रच रही हैं नया इतिहास

अगर हम पिछले कुछ समय के बॉक्स ऑफिस आंकड़ों का विश्लेषण करें, तो हॉरर-कॉमेडी और सुपरनैचुरल फिल्मों की सफलता का स्ट्राइक रेट सबसे ज्यादा रहा है:

  • स्त्री 2 (Stree 2): मजबूत लेखन और बेहतरीन टाइमिंग के दम पर यह फिल्म 'जवान' और 'पठान' जैसी भारी-भरकम एक्शन फिल्मों के क्लब में शामिल हुई।
  • मुंज्या (Munjya): बिना किसी बड़े ए-लिस्ट स्टार के, सिर्फ एक लोककथा और CGI कैरेक्टर के दम पर 100 करोड़ी क्लब में जगह बनाई।
  • शैतान (Shaitaan): हालांकि यह एक हॉरर-थ्रिलर थी, लेकिन सीमित बजट में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी लागत से कई गुना ज्यादा मुनाफा कमाया।
  • भूल भुलैया 3 (Bhool Bhulaiyaa 3): इस फ्रेंचाइजी ने एक बार फिर साबित किया कि दिवाली जैसे बड़े त्योहारों पर दर्शकों की पहली पसंद एक्शन से ज्यादा कॉमेडी-हॉरर का कॉम्बिनेशन है।

स्टार पावर पर भारी पड़ी राइटिंग और भारतीय लोककथाएं

300 करोड़ी एक्शन फिल्मों का एक बहुत बड़ा हिस्सा सिर्फ सुपरस्टार्स की फीस और महंगी इंटरनेशनल लोकेशंस में चला जाता है। नतीजतन, फिल्म की स्क्रिप्ट और स्क्रीनप्ले को निखारने का समय मेकर्स के पास नहीं बचता। यही वजह है कि कई बड़े स्टार्स की बिग-बजट फिल्में सिनेमाघरों में आते ही धराशायी हो जाती हैं।

दूसरी ओर, हॉरर-कॉमेडी फिल्मों की असली ताकत उनकी राइटिंग, लोकल फ्लेवर और पंचलाइन्स होती हैं। चंदेरी का भूत हो या कोकण की लोककथाओं से निकला 'मुंज्या', हमारी अपनी भारतीय कहानियों में मनोरंजन का अपार खजाना है। दर्शक जब पर्दे पर अपनी जड़ों से जुड़ी कहानियों को नए कलेवर में देखते हैं, तो वे खुद को उससे तुरंत जोड़ पाते हैं।

सिनेमा का नया दौर

बॉक्स ऑफिस का यह बदलाव भारतीय सिनेमा के एक सेहतमंद दौर की शुरुआत है, जहां बड़े बजट के नाम पर कमजोर कंटेंट बेचने का फॉर्मूला अब फ्लॉप हो रहा है। जब तक बड़े मेकर्स सिर्फ स्टार-पावर और भारी-भरकम VFX पर निर्भर रहेंगे, तब तक तगड़े कंटेंट और कम बजट वाली हॉरर-कॉमेडी फिल्में यूं ही 300 करोड़ी धुरंधरों का गणित बिगाड़ती रहेंगी।

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